कोरबा में आंगनबाड़ी निर्माण बना ‘मौत का ढांचा’ पुरानी ईंटे, कॉलम का स्पेसिफिकेशन, फिलिंग और तराई….

कोरबा, नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 14 अमरैयापारा और चिमनी भट्ठा में बन रहे आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण में गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे है, गुणवत्ताविहीन कार्य अब बड़े घोटाले की शक्ल लेता नजर आ रहा है। जिन भवनों में मासूम बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहां भ्रष्टाचार और लापरवाही की ऐसी नींव रखी जा रही है, जो कभी भी हादसे में बदल सकती है।
स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और पूर्व पार्षद टीकम राठौर के मुताबिक, निर्माण कार्य में गुणवत्ता को पूरी तरह दरकिनार कर सस्ते और घटिया मटेरियल का खुला खेल खेला जा रहा है। आरोप है कि रेत, सीमेंट और ईंट जैसे बुनियादी निर्माण सामग्री तक में भारी अनियमितता बरती जा रही है—पुराने, जर्जर ईंटों और कमजोर सीमेंट से दीवारें खड़ी की जा रही हैं, जो देखने में ही असुरक्षित प्रतीत होती हैं। वही कॉलम में रिंग स्पेसिफिकेशन बहुत ज्यादा देखने को मिल रहा है, बिना फिलिंग और कंपैक्शन के ग्राउंड बीम की ढलाई करने से फ्लोर के दबने और खराब होने की संभावना जताई गई है, ग्राउंड बीम मुख्यतः फिलिंग सामग्री को अन्दर से बाहर आने से रोकना और फ्लोर की मजबूती के लिए अहम माना जाता है, लेकिन देखने की बात है कि ग्राउंड फ्लोर की फिलिंग किए बिना बीम की ढलाई की जा रही है, ऐसे में ग्राउंड बीम के नीचे फिलिंग कंपैक्शन नहीं हो पाएगी, पुरानी ईंट का उपयोग किया जा रहा है जिसमें न धार है न कोर है, कॉलम में निर्माण की दिनांक गायब है, गर्मी के समय कॉलम की सेटरिंग खुलने के बाद पानी की तराई हेतु जुट बोर का उपयोग किया जाता है जो देखने को नजर नहीं आ रहा है,

जूट बोरों से कवर करने के संबंध में मुख्य बातें :

उद्देश्य: यह कंक्रीट में नमी बनाए रखने (तराई), सिकुड़न दरारें (shrinkage cracks) को कम करने और उच्च शक्ति सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

समय: कंक्रीट सेट होने के बाद, आमतौर पर अगले दिन सुबह या 24 घंटे के बाद।

प्रक्रिया: जूट बोरों को कॉलम के चारों ओर लपेटें और उन्हें दिन में 3-4 बार पानी का छिड़काव करके लगातार गीला रखें।

अवधि: बेहतर मजबूती के लिए 7 से 14 दिनों तक तराई की सलाह दी जाती है।

विशेष परिस्थिति: गर्मी के मौसम में नमी बनाए रखने के लिए जूट बैग से ढकना अनिवार्य है।

नियमों की अनदेखी की वजह से वार्डवासियों में नाराजगी देखने को मिल रही है, नाम नहीं छापने की शर्त पर वार्डवासियों ने बताया कि गुणवत्ताहीन आंगनबाड़ी को तोड़ कर नए सीरे से बनाया जाए और गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए अन्यथा विरोध स्वरूप ढांचे को स्वयं तोड़ कर आंगनबाड़ी के निर्माण को रोकेंगे।

बच्चों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़

यह वही आंगनबाड़ी केंद्र हैं जहां छोटे-छोटे बच्चे रोज आते हैं। ऐसे में इस तरह का लापरवाह और घटिया निर्माण सीधे-सीधे उनकी जान के साथ खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

‘मिलीभगत’ का खेल?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद जिम्मेदार विभाग और अधिकारी अब तक पूरी तरह खामोश हैं। न तो कोई निरीक्षण हुआ, न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई। इससे साफ तौर पर यह संदेह गहराता है कि कहीं न कहीं अधिकारियों और ठेकेदार के बीच सांठगांठ का खेल चल रहा है।
एक ठेकेदार, कई निर्माण, एक ही कहानी

आरोपों के घेरे में आए ठेकेदार हरिश्चंद्र दुबे पर यह भी आरोप है कि वह अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देकर एक-दो नहीं बल्कि करीब 20-22 आंगनबाड़ी केंद्रों का काम ले चुका है। और हर जगह एक जैसी कहानी—घटिया मटेरियल, नियमों की अनदेखी और मनमानी निर्माण।

जनता का आक्रोश

वार्डवासियों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर इस तरह का निर्माण करना सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि बच्चों की जान से सीधा खिलवाड़ है।

बड़ा सवाल:

जब बच्चों की सुरक्षा और भविष्य दांव पर हो, तो आखिर जिम्मेदार सिस्टम क्यों चुप है?
कब होगी निष्पक्ष जांच?
और कब कटघरे में खड़े होंगे दोषी?

स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई जा सके।

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