विशेष आस्था डेस्क
नई दिल्ली/रायपुर: आज का दिन देशवासियों के लिए दोहरी खुशियां लेकर आया। एक तरफ जहां सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य के लिए हरितालिका तीज का कठिन निर्जला व्रत रखा, वहीं दूसरी तरफ घर-घर में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की स्थापना के साथ गणेश उत्सव की शुरुआत हुई। लेकिन इस उत्सव का आनंद तब दोगुना हो गया जब सूर्यास्त के बाद प्रकृति ने भी आसमान में अपनी अद्भुत छटा बिखेर दी।
शाम होते ही आसमान में हंसिए के आकार का बेहद खूबसूरत और बारीक चंद्रमा दिखाई दिया, जिसके ठीक शीर्ष पर ‘शुक्र तारा’ (Venus) इस तरह विराजमान था मानो भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा और मां पार्वती का सिंदूर एक साथ चमक रहा हो।
✨ तीज के व्रत और गणेश उत्सव में लगा चार चांद
- शिव-पार्वती का आशीर्वाद: हरितालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की याद में रखा जाता है। व्रती महिलाओं ने जब शाम की पूजा के बाद आसमान की ओर देखा, तो चंद्रमा और शुक्र के इस अनूठे मिलन को भगवान शिव और गौरी के साक्षात आशीर्वाद के रूप में देखा गया।
- गणेश जी के मस्तक का शृंगार: पौराणिक कथाओं में भगवान गणेश का संबंध भी कलाओं और चंद्रमा से जोड़ा जाता है। गणपति स्थापना के पहले ही दिन आसमान में दिखे इस चमकीले और दुर्लभ नजारे को भक्तों ने मंगलकारी और बेहद शुभ संकेत माना है।
- चौरचन का भी रहा संयोग: आज के ही दिन पूर्वी भारत और मिथिलांचल में ‘चौरचन’ (चौठ चंद्र) का पर्व भी मनाया जा रहा है, जिसमें चंद्रमा की विशेष पूजा की जाती है। इस पर्व के दौरान चांद का यह अनोखा रूप भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा।
🔭 क्या था इस अद्भुत नजारे का वैज्ञानिक कारण?
खगोल विज्ञान के नजरिए से आज ‘लूनर ऑकल्टेशन ऑफ वीनस’ (Lunar Occultation of Venus) की दुर्लभ घटना हुई। इसमें चंद्रमा, पृथ्वी और शुक्र ग्रह के बीच से गुजरा, जिससे शुक्र ग्रह चंद्रमा के बेहद करीब (कुछ हिस्सों में उसके पीछे छिपता हुआ) दिखाई दिया। आज चंद्रमा का केवल 11% हिस्सा ही चमक रहा था, जिसने इस दृश्य को और ज्यादा नयनरमीय और कलात्मक बना दिया।
देश भर के मंदिरों, सोसायटियों और घरों की छतों से लोग इस मनमोहक नजारे को निहारते और अपने कैमरों में कैद करते नजर आए। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे “तीज और गणेश चतुर्थी पर प्रकृति का दिव्य उपहार” बताकर तस्वीरें साझा कर रहे हैं।






