कोरबा, जिले ही नहीं अपितु पूरे प्रदेश में धान खरीदी को महा त्यौहार के रूप में छत्तीसगढ़ के किसान मना रहे है, लेकिन डबल इंजन के सरकार में धान नहीं बिकने से किसान आत्महत्या करने को मजबूर है, ऐसा हम नहीं कह रहे है ऐसा व्यवस्था कह रही है, धान खरीदी की लिमिट तय हो जाने से किसान धान बेचने भटक रहे है, ऐसा लगता है कि खरीदी के आंकड़े सिर्फ और सिर्फ कागजों पर दिखाई दे रही है, प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित किसान सुमेर सिंह, ग्राम पुटा, हरदीबाजार का निवासी है। बताया जा रहा है कि किसान पिछले एक महीने से अपना धान बेचने के लिए भटक रहा था, लेकिन न तो उसका धान खरीदा गया और न ही उसे खरीदी का टोकन उपलब्ध कराया गया। आरोप है कि नोनबिर्रा फड़ प्रभारी द्वारा उसे लगातार आज-कल कहकर घुमाया जा रहा था। हताश होकर किसान ने पूर्व जनदर्शन में भी अपनी पीड़ा रखी, लेकिन वहां से भी उसे कोई ठोस समाधान नहीं मिला। अंततः प्रशासनिक उदासीनता और व्यवस्था की मार से टूटकर किसान ने जहर का सेवन कर लिया। घटना की जानकारी मिलते ही कोरबा प्रवास पर रहीं सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत जिला अस्पताल पहुंचीं और पीड़ित किसान से मुलाकात कर उसकी स्थिति की जानकारी ली।
किसने किसान को ऐसा आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कार्यवाही की आवश्यकता है जिससे दोषियों पर कार्यवाही हों,
वर्तमान समय में धान खरीदी केंद्रों में किसानों को हो रही समस्या को लेकर समय समय पर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के द्वारा आवाज उठाया जाता है जिसके बाद भी धान खरीदी केंद्रों के प्रबंधक और फड़ प्रभारी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है, कुछ दिनों पूर्व भाजपा और कांग्रेस के युवा नेताओं के द्वारा जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा गया था जिस पर प्रशासन के द्वारा जांच कार्यवाही नहीं की गई है ऐसे में लगता है कि किसानों के हित की चिंता अधिकारी कर्मचारियों को नहीं है,
धान खरीदी के खबरों पर सरकार और प्रशासनिक अधिकारी कार्यवाही करे तो निश्चित ही किसानों को इस का लाभ मिलेगा।
किसान के पुत्र ने बताया कि पिता जी धान बेचने को लेकर बहुत परेशान थे धान को बेच बेच कर तहसीलदार और पटवारी के पास जाकर अपनी समस्या बता रहे थे, लेकिन तहसीलदार पटवारी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे थे, फसल के लिए कुछ उधार हो गया था हमाल, हार्वेस्टर, धान परिवहन और भी लोग अपनी मजदूरी का भुगतान मांग रहे थे, और पिताजी धान का टोकन नहीं करने से परेशान थे, घर में धान रखने की जगह नहीं होने से धान बाहर सड़क पर रखे है किराया के मकान में निवास करते है,
नोनबिर्रा धान फड़ प्रभारी ने बताया कि किसान के खेत गोदावरी के समय पठार और अन्य फसल लिखा होने से किसान का धान नहीं लिया जा रहा था किसान पटवारी कार्यालय और तहसील कार्यालय जा रहा था जिसमें सुनवाई विलंब हो रही थी, निराकरण का आश्वासन अधिकारी दिए थे,






