
16 साल बाद आई खुशियां बदली मातम में आयुष्मान हॉस्पिटल में जन्मे जुड़वां बच्चे में दोनों बच्चों की मौत, परिजनों ने 14 बिन्दुओं पर जांच की मांग को लेकर किया प्रदर्शन नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, पुलिस रही मुस्तैद,
कोरबा, कोरबा के शारदा विहार स्थित आयुष्मान चिकित्सालय में जन्मे जुड़वा नवजात बच्चों की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। वहीं 19 जुलाई को सूचना मिलने पर मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।
जानकारी के अनुसार, परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा के परिवार में शादी के लगभग 16 साल बाद खुशियों ने दस्तक दी थी। उनकी पत्नी ने 16 जुलाई को आयुष्मान चिकित्सालय में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। लंबे इंतजार के बाद परिवार में दो नन्हे मेहमानों के आने से खुशी का माहौल था।
परिजनों के मुताबिक, जन्म के कुछ ही घंटों बाद एक नवजात के शरीर पर पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे। उन्होंने तत्काल ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को इसकी जानकारी दी। आरोप है कि चिकित्सकों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और परिजनों को यह कहकर आश्वस्त किया कि “हम लोग हैं ना, घबराइए मत।”
परिजनों का कहना है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने से बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई। जब स्थिति बेहद गंभीर हो गई, तब उनके दबाव के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को दूसरे अस्पताल के लिए रेफर किया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान नवजात की मौत हो गई। दूसरे बच्चे को बिलासपुर के शिशु भवन ले जाया गया लेकिन उसकी मौत भी रात 8:45 में हो गई परिवार पर दुखो का पहाड़ टूट पड़ा है, परिजनों ने 19 जुलाई को एक बच्चे और 20 जुलाई को दूसरे बच्चे को मिट्टी दिया, मिट्टी देने के बाद परिजन पुनः आयुष्मान हॉस्पिटल पहुंचे और अपनी 14 बिंदुओं की मांग को लेकर हॉस्पिटल में धरने पर बैठ गए, हॉस्पिटल में परिजनों के बैठने की सूचना मिलते ही मानिकपुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला,
बच्चे की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
फिलहाल परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
परिजनों ने हॉस्पिटल पर जांच के लिए निम्न 14 बिंदुओं की मांग की है….
1, हॉस्पिटल को कितने बेड का परमीशन मिला है और कितने स्टाफ रखने चाहिए इसकी तुरंत जांच की जाए,
2, हॉस्पिटल में कार्यरत समस्त कर्मचारियों का प्रमाणपत्र की जांच की जाए,
3, हॉस्पिटल में रेडियोलॉजिस्ट कौन है इसकी जांच की जाए, इनके द्वारा बिना रेडियोलॉजिस्ट के सोनोग्राफी की जाती है,
4, हॉस्पिटल संचालन के समय हॉस्पिटल प्रबंधन ने कौन सी जमीन पार्किंग हेतु दिखाई है इसकी जांच की जाए क्यों कि हॉस्पिटल के पास स्वयं का पार्किंग नहीं है, हॉस्पिटल द्वारा आम रास्ता में रैंप बना कर कब्जा किया गया है साथ की नाले के ऊपर ढलाई कर कब्जा किया गया है जिसकी जांच कर तुरंत तोड़ने की कार्यवाही की जाए,
5, हॉस्पिटल में लगे सीसीटीवी कैमरा की फुटेज 18 जुलाई 2026 की सुबह 11 बजे से 19 जुलाई की सुबह 12 बजे तक का उपलब्ध कराया जाए,
6, पूर्व में भी हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर लापरवाही बरतने का आरोप है उसकी कॉपी उपलब्ध कराई जाए,
7, हॉस्पिटल के भवन निर्माण हेतु नक्शे का अवलोकन कर अवैध रूप से बने हॉस्पिटल पर कार्यवाही की जाए,
8, पैसे के लालची दोषी डॉक्टर का लाइसेंस रद्द किया जाए और हॉस्पिटल की मान्यता शून्य की जाए,
9, घर की महिलाओं से साथ। हुज्जत बाजी और गाली गलौज के मामले में एफआईआर दर्ज कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए,
10, बिलिंग के हमारे द्वारा जमा किए गए पैसे का हिसाब दिया जाय और बताया जाए कि कब हमने 50 हजार रूपये मांगे है, हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा जब भी बोला गया है कि पैसे जमा करो पैसे जमा कराए गए है,
11, मैडम ने बोला था बच्चा स्वस्थ है तो दोनों बच्चे कैसे दूसरे अस्पताल में खत्म हो गए इसकी जांच की जाए,
12, दोनों बच्चों के शव का पोस्टमार्टम जांच टीम गठित कर पोस्टमार्टम किया जाए और वीडियोग्राफी करवाई जाए,
13, जब तक जांच चले तब तक हॉस्पिटल को बंद किया जाए,
14, मुआवजा के रूप में हॉस्पिटल प्रबंधन के द्वारा 1 करोड़ रुपए दिए जाएं,
परिजनों ने नायब तहसीलदार को अपनी 14 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा,





