जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत मदनपुर के अंतर्गत आने वाले शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मदनपुर विकास खण्ड व जिला कोरबा से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ शिक्षा के मंदिर में नौनिहालों के हाथों में कलम की जगह भारी-भरकम बोझ थमा दिया गया है। स्कूल प्रबंधन द्वारा मासूम बच्चों से मजदूरी कराने का एक मामला प्रकाश में आया है, जहाँ बच्चों से गाड़ी में किताबों के भारी बंडल लोड करवाए जा रहे हैं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां,
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में आई नई किताबों की खेप या पुरानी सामग्रियों को गाड़ी में चढ़ाने के लिए मजदूरों को बुलाने के बजाय स्कूल के ही छात्र-छात्राओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। कड़कड़ाती धूप और गर्मी के बीच बच्चे भारी बंडलों को उठाकर गाड़ी में डालते नजर आए। यह सीधे तौर पर बाल श्रम निषेध कानून और शिक्षा के अधिकार (RTE) के नियमों का उल्लंघन है।
अभिभावकों में भारी आक्रोश
इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों और बच्चों के अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। पालकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करने और भविष्य संवारने के लिए भेजते हैं, न कि इस तरह की शारीरिक मजदूरी करने के लिए। स्कूल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से बचते हुए मासूमों की सेहत और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहा है।उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और कोरबा कलेक्टर से करने का मन बनाया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने मांग की है कि इस लापरवाही और अवैध कृत्य के लिए जिम्मेदार स्कूल के प्राचार्य और संबंधित स्टाफ के खिलाफ तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी अन्य स्कूल में बच्चों के साथ ऐसा बर्ताव न हो।






