बसों के छत में पार्सल बिना जांच के, क्षमता से अधिक सवारियां, कार्यवाही शून्य,

कोरबा, जिले के नया बस स्टैंड और सीएसईबी चौक में संवाददाता को जांच करने के दौरान कुछ फोटो बनाए और बस कंडक्टर व ड्राइवरों से बात की। बस ड्राइवर और कंडक्टर कुछ पैसों की लालच में बिना जांच कराए पार्सल ले जाने के लिए तैयार हो गए। संवाददाता ने सामान पहुंचाने की गारंटी पूछी तो कंडक्टर ने रोज का काम होने की बात कहते हुए अपना नंबर दिया और सामान रिसिव करने वाले शख्स को उस नंबर देकर बात करने के लिए कहा।

सामान पहुंचाने की पूरी गारंटी

बस ड्राइवर और कंडेक्टर की मनमानी को देखने के लिए संवाददाता ने 1 घंटा नया बस स्टैंड टीपी नगर में समय व्यतीत किया। बस स्टैंड में मौजूद रहने के दौरान संवाददाता ने देखा कि पार्सल दूसरे जिलों में भेजने के लिए किसी को साथ जाने की जरूरत नहीं है।

बस सामान बस में रखा दो और ड्राइवर-कंडक्टर को पैसा देकर उसकी सूचना दे दो। सुरक्षा के लिए ड्राइवर-कंडेक्टर का नंबर ले लो और बस की फोटो खीचकर पार्सल रिसीव करने वाले शख्स को पूरी जानकारी दे दो। पार्सल भेजने वाले शख्स से पैेसे मिलते ही ड्राइवर-कंडक्टर अपना नंबर देते है और बस संबंधित ठिकाने में पहुंचने का समय बताते हुए पार्सल रिसीवर को देने की बात कहते है।

जांच की व्यवस्था नहीं

यात्री बसों को जांचने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। नियमानुसार परिवहन विभाग की फ्लाइंग टीम को सरप्राइज चेकिंग करके यात्री और उसमें ढोए जा रहे सामान की जांच करनी है और नियम विरूद्ध बसों का परिचालन होने पर ड्राइवर, कंडेक्टर और संचालक पर कार्रवाई करनी है।

बस स्टैंड में यात्री बसों के संचालको ने अपने कारोबार पर निगरानी रखने के लिए ट्रैवल्स के नाम से बस स्टैंड में कार्यालय खोला है। इस कार्यालय के बावजूद धडल्ले से यात्रियों की सीट के पास सामान रखकर चालक और कंडक्टर परिवहन कर रहे है।

बिना जांच पार्सल के जाने से अवैध कार्य करने वालों की चांदी चांदी हो जाती है, बस में अवैध सामानों की तस्करी का नया नया कारनामा देखने सुनने को मिलता रहता है यात्रियों की सुरक्षा को लेकर जिला परिवहन विभाग गंभीर नहीं है,

क्षमता से अधिक सवारियां

यात्री बसों में निर्धारित यात्रियों से ज्यादा सवारी बिठाना और सामान परिवहन करना नियम विरूद्ध है। इसके बाद भी बस में ड्राइवर और कंडक्टर चंद पैसों के लालच में क्षमता से अधिक सवारी बिठाते है और यात्रियों की जान जोखिम में डालते है,

जिला परिवहन अधिकारी के द्वारा सख्ती तो बरती जाती है लेकिन धरातल में इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है

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